Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.271.16: उधर क्षेमंकर और महामुख नामक दो वीर राजकुमारों ने नकुल को लक्ष्य करके उस पर दोनों ओर से तीखे बाणों की वर्षा की।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.271.16 
नकुलं त्वभिसंधाय क्षेमङ्करमहामुखौ।
उभावुभयतस्तीक्ष्णै: शरवर्षैरवर्षताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उधर क्षेमंकर और महामुख नामक दो वीर राजकुमारों ने नकुल को लक्ष्य करके उस पर दोनों ओर से तीखे बाणों की वर्षा की।
 
On the other side two brave princes named Kshemankar and Mahamukha aimed at Nakul and showered sharp arrows on him from both the sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)