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mahabharat 3.271.11: सहदेव अपने रथ पर आगे बढ़े और हाथियों पर सवार योद्धाओं का सामना किया और उन्हें 'नाराच' नामक बाणों से मारना शुरू कर दिया, जैसे कोई शिकारी मोरों को घायल करके उन्हें पेड़ों से गिरा रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.271.11 
सहदेवस्तु संयाय रथेन गजयोधिन:।
पातयामास नाराचैर्द्रुमेभ्य इव बर्हिण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सहदेव अपने रथ पर आगे बढ़े और हाथियों पर सवार योद्धाओं का सामना किया और उन्हें 'नाराच' नामक बाणों से मारना शुरू कर दिया, जैसे कोई शिकारी मोरों को घायल करके उन्हें पेड़ों से गिरा रहा हो।
 
Sahadeva advanced in his chariot and confronted the warriors mounted on elephants and began to slay them with arrows called 'Naraach', as if a hunter were wounding peacocks and making them fall from trees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)