श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.271.10 
ददृशे नकुलस्तत्र रथात् प्रस्कन्द्य खड्गधृक्।
शिरांसि पादरक्षाणां बीजवत् प्रवपन् मुहु:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महावीर नकुल हाथ में तलवार लेकर रथ से कूद पड़े और पैदल रक्षकों के सिरों को काटकर उन्हें बीज की तरह बार-बार भूमि पर बोते हुए दिखाई दिए॥10॥
 
Mahaveer Nakula jumped from the chariot with sword in his hand and was seen cutting off the heads of the foot guards and sowing them on the ground like seeds, again and again.॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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