श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.271.1 
वैशम्पायन उवाच
संतिष्ठत प्रहरत तूर्णं विपरिधावत।
इति स्म सैन्धवो राजा चोदयामास तान्नृपान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - हे राजन! तब सिन्धुराज जयद्रथ अपने साथ युद्ध के लिए आये हुए राजाओं को 'रुको, मारो, तेजी से भागो' कहकर उत्साहित करने लगा।
 
Vaishmpayana says - O King! Then Sindhuraj Jayadratha started encouraging the kings who had come with him for the war by saying 'Stop, kill, run fast'. 1.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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