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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन
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श्लोक 8
श्लोक
3.27.8
दुर्योधनस्य कर्णस्य शकुनेश्च दुरात्मन:।
दुर्भ्रातुस्तस्य चोग्रस्य राजन् दु:शासनस्य च॥ ८॥
अनुवाद
दुर्योधन, कर्ण, दुष्टात्मा शकुनि और उग्र स्वभाव वाले दुष्ट भाई दु:शासन - इन सबकी आँखों में आँसू नहीं थे॥8॥
Duryodhana, Karna, the evil spirit Shakuni and the fierce-natured evil brother Dushasan – there were no tears in their eyes. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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