इसी प्रकार जो क्षत्रिय क्षमा करने का समय आने पर शांत नहीं होता, वह समस्त प्राणियों के लिए अप्रिय हो जाता है और इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी विनाश को प्राप्त होता है ॥40॥
Similarly, a Kshatriya who does not calm down when the time comes for him to forgive becomes unpleasant to all living beings and is doomed to destruction in this world as well as the next world. 40॥
इ ति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि द्रौपदीपरितापवाक्ये सप्तविंशोऽध्याय:॥ २७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें द्रौपदीके अनुतापपूर्णवचनविषयक सत्ताईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)