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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन
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श्लोक 38
श्लोक
3.27.38
यो न दर्शयते तेज: क्षत्रिय: काल आगते।
सर्वभूतानि तं पार्थ सदा परिभवन्त्युत॥ ३८॥
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! जो क्षत्रिय समय आने पर अपना प्रभाव नहीं दिखाता, वह समस्त प्राणियों द्वारा सदैव तिरस्कृत होता है। 38॥
Kuntinandan! The Kshatriya who does not show his influence when the time comes is always despised by all living beings. 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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