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यो देवांश्च मनुष्यांश्च सर्पांश्चैकरथोऽजयत्॥ २८॥
तं ते वनगतं दृष्ट्वा कस्मान्मन्युर्न वर्धते।
अनुवाद
एक ही रथ के द्वारा देवताओं, मनुष्यों और नागों को जीतने वाले अर्जुन को वनवास का कष्ट सहते देखकर आपका क्रोध क्यों नहीं बढ़ता? ॥28 1/2॥
Why does your anger not increase when you see Arjuna, who conquered gods, men and serpents with the help of a single chariot, suffering the pain of exile? ॥28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥