सत्कृतं विविधैर्यानैर्वस्त्रैरुच्चावचैस्तथा॥ २२॥
तं ते वनगतं दृष्ट्वा कस्मान्मन्युर्न वर्धते।
अनुवाद
जब आप नाना प्रकार के वाहनों और नाना प्रकार के वस्त्रों से सम्मानित भीमसेन को वन में कष्ट सहते हुए देखते हैं, तब आपका क्रोध शत्रुओं पर क्यों नहीं भड़कता?
Why does your anger not flare up against the enemies when you see Bhimasena, who was honored with various vehicles and various kinds of clothes, suffering in the forest?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)