vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन
»
श्लोक 16
श्लोक
3.27.16
यतीनामगृहाणां ते तथैव गृहमेधिनाम्।
दीयते भोजनं राजन्नतीवगुणवत् प्रभो॥ १६॥
अनुवाद
हे महाबली राजन! उन दिनों तपस्वियों, ब्रह्मचारियों और गृहस्थ ब्राह्मणों को प्रतिदिन अत्यन्त पौष्टिक भोजन दिया जाता था ॥16॥
O mighty King! In those days, very nutritious food was offered daily to the ascetics, brahmacaris and householder brahmins. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×