श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.27.16 
यतीनामगृहाणां ते तथैव गृहमेधिनाम्।
दीयते भोजनं राजन्नतीवगुणवत् प्रभो॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे महाबली राजन! उन दिनों तपस्वियों, ब्रह्मचारियों और गृहस्थ ब्राह्मणों को प्रतिदिन अत्यन्त पौष्टिक भोजन दिया जाता था ॥16॥
 
O mighty King! In those days, very nutritious food was offered daily to the ascetics, brahmacaris and householder brahmins. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)