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mahabharat 3.27.14: राजेंद्र! पहले मैंने तुम्हें चमकीले रेशमी वस्त्र पहने देखा था, पर आज छाल के वस्त्र पहने देख रही हूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.27.14 
या त्वाहं कौशिकैर्वस्त्रै: शुभ्रैराच्छादितं पुरा।
दृष्टवत्यस्मि राजेन्द्र सा त्वां पश्यामि चीरिणम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! पहले मैंने तुम्हें चमकीले रेशमी वस्त्र पहने देखा था, पर आज छाल के वस्त्र पहने देख रही हूँ।
 
Rajendra! I had seen you earlier dressed in bright silken clothes, but today I see you wearing bark clothes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)