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mahabharat 3.27.12: हे राजन! मैंने आपको इन्द्रप्रस्थ के दरबार में राजाओं से घिरा हुआ देखा है, अतः आज आपको उस अवस्था में न देखकर मेरे हृदय को शांति कैसे मिल सकती है? ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.27.12 
यदपश्यं सभायां त्वां राजभि: परिवारितम्।
तच्च राजन्नपश्यन्त्या: का शान्तिर्हृदयस्य मे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने आपको इन्द्रप्रस्थ के दरबार में राजाओं से घिरा हुआ देखा है, अतः आज आपको उस अवस्था में न देखकर मेरे हृदय को शांति कैसे मिल सकती है? ॥12॥
 
O King! I have seen you surrounded by kings in the court of Indraprastha, so how can my heart get peace by not seeing you in that condition today? ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)