Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.27.10: महाराज! आज आपका बिस्तर देखकर मुझे पुराने राजसी बिस्तर की याद आ रही है और मुझे आपके लिए दुःख हो रहा है, क्योंकि आप दुःख के योग्य नहीं हैं, केवल सुख के पात्र हैं॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 3.27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 27: द्रौपदीका युधिष्ठिरसे उनके शत्रुविषयक क्रोधको उभाड़नेके लिये संतापपूर्ण वचन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.27.10 
इदं च शयनं दृष्ट्वा यच्चासीत् ते पुरातनम्।
शोचामि त्वां महाराज दु:खानर्हं सुखोचितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आज आपका बिस्तर देखकर मुझे पुराने राजसी बिस्तर की याद आ रही है और मुझे आपके लिए दुःख हो रहा है, क्योंकि आप दुःख के योग्य नहीं हैं, केवल सुख के पात्र हैं॥ 10॥
 
Maharaj! Today, seeing your bed reminds me of the royal bed of old and I feel sad for you because you are unworthy of suffering and deserve only happiness.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)