श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.269.8 
यथा वदत्येष विहीनयोनि:
शालावृको वाममुपेत्य पार्श्वम्।
सुव्यक्तमस्मानवमन्य पापै:
कृतोऽभिमर्द: कुरुभि: प्रसह्य॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हमारे वाम भाग से निकले इस नीच सियार की आवाज से स्पष्ट प्रतीत होता है कि पापी कौरवों ने यहाँ आकर हमारा अनादर करके महान संहार किया है।॥8॥
 
From the sounds made by this low-born jackal, who has passed from our left side, it clearly appears that the sinful Kauravas have come here and have caused great carnage by disregarding us.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)