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mahabharat 3.269.25: तत्पश्चात् उन्होंने जयद्रथ की सेना के घोड़ों के प्रहार से उड़ती हुई धूल देखी। साथ ही उन्होंने पुरोहित धौम्य को पैदल सेना के बीच में चलते हुए और बार-बार "भीमसेन! भागो!" पुकारते हुए देखा।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.269.25 
ततोऽपश्यंस्तस्य सैन्यस्य रेणु-
मुद्‍भूतं वै वाजिखुरप्रणुन्नम्।
पदातीनां मध्यगतं च धौम्यं
विक्रोशन्तं भीममभिद्रवेति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने जयद्रथ की सेना के घोड़ों के प्रहार से उड़ती हुई धूल देखी। साथ ही उन्होंने पुरोहित धौम्य को पैदल सेना के बीच में चलते हुए और बार-बार "भीमसेन! भागो!" पुकारते हुए देखा।॥25॥
 
Thereafter he saw dust flying due to the blows of the horses of Jayadratha's army. Along with it he also saw the priest Dhoumya walking among the infantry and repeatedly calling out, "Bhimasena! Run."॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)