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mahabharat 3.269.13-14h: जो पाण्डवों की सबसे अनमोल मणि और प्राणों के समान प्रिय है, जो सब प्रकार के कष्टों को सहन करने में समर्थ है, शत्रुओं का गर्व चूर करने वाली है और कभी किसी से पराजित नहीं होती, उस द्रौपदी का हरण कौन मूर्ख करेगा?॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  3.269.13-14h 
को हीदृशानामरिमर्दनानां
क्लेशक्षमानामपराजितानाम्॥ १३॥
प्राणै: समामिष्टतमां जिहीर्षे-
दनुत्तमं रत्नमिव प्रमूढ:।
 
 
अनुवाद
जो पाण्डवों की सबसे अनमोल मणि और प्राणों के समान प्रिय है, जो सब प्रकार के कष्टों को सहन करने में समर्थ है, शत्रुओं का गर्व चूर करने वाली है और कभी किसी से पराजित नहीं होती, उस द्रौपदी का हरण कौन मूर्ख करेगा?॥13 1/2॥
 
Who is the fool who would abduct Draupadi, who is like the Pandavas' most precious jewel and their beloved like their life, who is capable of bearing all kinds of sufferings and who crushes the pride of their enemies and is never defeated by anyone?॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)