श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.269.11 
किं रोदिषि त्वं पतिता धरण्यां
किं ते मुखं शुष्यति दीनवर्णम्।
कच्चिन्न पापै: सुनृशंसकृद्भि:
प्रमाथिता द्रौपदी राजपुत्री॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तुम इस प्रकार भूमि पर गिरकर क्यों रो रहे हो? तुम्हारा मुख इतना उदास और शुष्क क्यों है? क्या अत्यन्त क्रूर कर्म करने वाले पापी कौरवों ने यहाँ आकर राजकुमारी द्रौपदी का अपमान किया है?॥11॥
 
Why are you crying like this on the ground? Why is your face so sad and dry? Have the sinful Kauravas, who have committed extremely cruel deeds, come here and insulted Princess Draupadi?॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)