श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 269: पाण्डवोंका आश्रमपर लौटना और धात्रेयिकासे द्रौपदीहरणका वृत्तान्त जानकर जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.269.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो दिश: सम्प्रविहृत्य पार्था
मृगान् वराहान् महिषांश्च हत्वा।
धनुर्धरा: श्रेष्ठतमा: पृथिव्यां
पृथक् चरन्त: सहिता बभूवु:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! तत्पश्चात् संसार के श्रेष्ठ धनुर्धर कुन्ती के पाँचों पुत्र, सब दिशाओं में घूमते हुए तथा भयंकर पशुओं, सूअर और जंगली भैंसों का वध करते हुए, अलग-अलग विचरण करते हुए, एक साथ आ गए॥1॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Thereafter the five sons of Kunti, the best archers of the world, after roaming about in all directions and killing ferocious animals, boars and wild buffaloes, after wandering separately, came together.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)