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mahabharat 3.268.7: यदि तुम क्रोध में भरे हुए भयंकर योद्धा अर्जुन के साथ युद्ध करना चाहते हो, तो समझ लो कि तुम एक सोये हुए भयंकर सिंह को लात मार रहे हो, जो पर्वत की गुफाओं में उत्पन्न हुआ है, वहीं पला-बढ़ा है तथा अत्यंत भयंकर एवं पराक्रमी है।   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.268.7 
महाबलं घोरतरं प्रवृद्धं
जातं हरिं पर्वतकन्दरेषु।
प्रसुप्तमुग्रं प्रपदेन हंसि
य: क्रुद्धमायोत्स्यसि जिष्णुमुग्रम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम क्रोध में भरे हुए भयंकर योद्धा अर्जुन के साथ युद्ध करना चाहते हो, तो समझ लो कि तुम एक सोये हुए भयंकर सिंह को लात मार रहे हो, जो पर्वत की गुफाओं में उत्पन्न हुआ है, वहीं पला-बढ़ा है तथा अत्यंत भयंकर एवं पराक्रमी है।
 
If you wish to fight with the fierce warrior Arjuna who is filled with anger, then understand that you are kicking a sleeping fearsome lion who was born in the caves of the mountain and grew up there and is extremely fierce and mighty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)