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mahabharat 3.268.28: वैशम्पायन कहते हैं: 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर धौम्य ऋषि पैदल सेना में सवार होकर उस सुप्रसिद्ध राजकुमारी द्रौपदी के पीछे-पीछे चलने लगे, जिसका हरण किया जा रहा था।   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.268.28 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त्वा ह्रियमाणां तां राजपुत्रीं यशस्विनीम्।
अन्वगच्छत् तदा धौम्य: पदातिगणमध्यग:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर धौम्य ऋषि पैदल सेना में सवार होकर उस सुप्रसिद्ध राजकुमारी द्रौपदी के पीछे-पीछे चलने लगे, जिसका हरण किया जा रहा था।
 
Vaishmpayana says: 'O Janamejaya! Having said this, the sage Dhoumya started walking through the infantry behind the illustrious princess Draupadi who was being taken away.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि अष्टषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें दो सौ अड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)