Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.268.23: वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! उस समय जयद्रथ के साथी आश्रम में घुस आए और द्रौपदी को पकड़ना चाहा। यह देखकर द्रौपदी ने बड़ी-बड़ी आँखों से उन्हें डाँटकर कहा, 'खबरदार, कोई मेरे शरीर को छूने न पाए।' तब भयभीत होकर उसने अपने पुरोहित धौम्य मुनि को बुलाया। | mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
सा ताननुप्रेक्ष्य विशालनेत्रा
जिघृक्षमाणानवभर्त्सयन्ती।
प्रोवाच मा मा स्पृशतेति भीता
धौम्यं प्रचुक्रोश पुरोहितं सा॥ २३॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'जनमेजय! उस समय जयद्रथ के साथी आश्रम में घुस आए और द्रौपदी को पकड़ना चाहा। यह देखकर द्रौपदी ने बड़ी-बड़ी आँखों से उन्हें डाँटकर कहा, 'खबरदार, कोई मेरे शरीर को छूने न पाए।' तब भयभीत होकर उसने अपने पुरोहित धौम्य मुनि को बुलाया।
Vaishampayana says, 'Janamejaya! At that time, Jayadratha's companions entered the hermitage and wanted to capture Draupadi. Seeing this, Draupadi with big eyes scolded them and said, 'Beware, no one should touch my body.' Then, frightened, she called her priest Dhoumya Muni.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥