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mahabharat 3.268.19: जब गाण्डीव धनुष धारण करने वाला अर्जुन शंखध्वनि के साथ दस्तानों की ध्वनि करता हुआ बार-बार बाण उठाकर तुम्हारी छाती पर प्रहार करेगा, उस समय तुम्हारे मन की क्या स्थिति होगी? (इस पर भी विचार करो)॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.268.19 
सशङ्खघोष: सतलत्रघोषो
गाण्डीवधन्वा मुहुरुद्वहंश्च।
यदा शरानर्पयिता तवोरसि
तदा मनस्ते किमिवाभविष्यत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब गाण्डीव धनुष धारण करने वाला अर्जुन शंखध्वनि के साथ दस्तानों की ध्वनि करता हुआ बार-बार बाण उठाकर तुम्हारी छाती पर प्रहार करेगा, उस समय तुम्हारे मन की क्या स्थिति होगी? (इस पर भी विचार करो)॥19॥
 
When Arjuna, wielding the Gandiva bow, will repeatedly lift his arrows and strike your chest, making the sound of his gloves along with the sound of the conch shell, what will be the state of your mind at that time? (Think about this too)॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)