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mahabharat 3.268.15: जब शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले, किरीटधारी अर्जुन शत्रुओं का मनोबल नष्ट करते हुए मेरे लिए रथ पर बैठकर तुम्हारी सेना में प्रवेश करेंगे, तब जैसे ग्रीष्म ऋतु में अग्नि घास और तिनकों को जला देती है, उसी प्रकार मैं तुम्हें और तुम्हारी सेना को भस्म कर दूँगा॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.268.15 
यदा किरीटी परवीरघाती
निघ्नन् रथस्थो द्विषतां मनांसि।
मदन्तरे त्वद्‍ध्वजिनीं प्रवेष्टा
कक्षं दहन्नग्निरिवोष्णगेषु॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले, किरीटधारी अर्जुन शत्रुओं का मनोबल नष्ट करते हुए मेरे लिए रथ पर बैठकर तुम्हारी सेना में प्रवेश करेंगे, तब जैसे ग्रीष्म ऋतु में अग्नि घास और तिनकों को जला देती है, उसी प्रकार मैं तुम्हें और तुम्हारी सेना को भस्म कर दूँगा॥ 15॥
 
When the crown-wearing Arjuna, the slayer of enemy warriors, destroying the morale of the enemies, will enter your army seated in his chariot for me, then just as fire burns grass and straw in summer, in the same manner I will reduce you and your army to ashes.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)