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mahabharat 3.268.14: जिस द्रौपदी को भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन रथ पर बैठकर खोजेंगे, उसका हरण देवराज इन्द्र भी नहीं कर सकते, फिर अन्य कोई दीन-हीन मनुष्य क्या कर सकता है?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.268.14 
यस्या हि कृष्णौ पदवीं चरेतां
समास्थितावेकरथे समेतौ।
इन्द्रोऽपि तां नापहरेत् कथंचि-
न्मनुष्यमात्र: कृपण: कुतोऽन्य:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जिस द्रौपदी को भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन रथ पर बैठकर खोजेंगे, उसका हरण देवराज इन्द्र भी नहीं कर सकते, फिर अन्य कोई दीन-हीन मनुष्य क्या कर सकता है?॥14॥
 
Even Devraj Indra cannot abduct Draupadi whom Lord Krishna and Arjuna will search for while sitting on a chariot. Then what can any other poor and downtrodden man do?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)