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mahabharat 3.268.10: जयद्रथ बोला- कृष्ण! मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पति पाण्डवराज कैसे हैं। ये सब बातें मुझे मालूम हैं। किन्तु इस समय तुम हमें इस भय से नहीं डरा सकतीं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.268.10 
जयद्रथ उवाच
जानामि कृष्णे विदितं ममैतद्
यथाविधास्ते नरदेवपुत्रा:।
न त्वेवमेतेन विभीषणेन
शक्या वयं त्रासयितुं त्वयाद्य॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जयद्रथ बोला- कृष्ण! मैं जानता हूँ कि तुम्हारे पति पाण्डवराज कैसे हैं। ये सब बातें मुझे मालूम हैं। किन्तु इस समय तुम हमें इस भय से नहीं डरा सकतीं॥10॥
 
Jaydrath said- Krishna! I know how your husband, the Pandava prince, is. I know all these things. But at this time you cannot scare us with this horror.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)