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mahabharat 3.267.d5: जयद्रथ बोला - कृष्ण! तुम राजाओं का धर्म नहीं जानते। विद्वान पुरुष कहते हैं कि इस संसार में स्त्रियाँ और रत्न साधारण लोगों की वस्तुएँ हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.267: जयद्रथ और द्रौपदीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 267: जयद्रथ और द्रौपदीका संवाद  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  3.267.d5 
जयद्रथ उवाच
राज्ञां धर्मं न जानीषे स्त्रियो रत्नानि चैव हि।
साधारणानि लोकेऽस्मिन् प्रवदन्ति मनीषिण:॥ )
 
 
अनुवाद
जयद्रथ बोला - कृष्ण! तुम राजाओं का धर्म नहीं जानते। विद्वान पुरुष कहते हैं कि इस संसार में स्त्रियाँ और रत्न साधारण लोगों की वस्तुएँ हैं।
 
Jayadratha said – Krishna! You don't know the religion of kings. Wise men say that in this world women and gems are common people's things.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि जयद्रथद्रौपदीसंवादे सप्तषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें जयद्रथद्रौपदीसंवादविषयक

दो सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६७॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)