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जयद्रथ बोला - कृष्ण! तुम राजाओं का धर्म नहीं जानते। विद्वान पुरुष कहते हैं कि इस संसार में स्त्रियाँ और रत्न साधारण लोगों की वस्तुएँ हैं।
Jayadratha said – Krishna! You don't know the religion of kings. Wise men say that in this world women and gems are common people's things.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि जयद्रथद्रौपदीसंवादे सप्तषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें जयद्रथद्रौपदीसंवादविषयक
दो सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६७॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥