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श्लोक  3.267.d1-d3 
(द्रौपद्युवाच
नैवं वद महाबाहो न्याय्यं त्वं न च बुध्यसे॥
पाण्डूनां धार्तराष्ट्राणां स्वसा चैव कनीयसी।
दु:शला नाम तस्यास्त्वं भर्ता राजकुलोद्वह॥
मम भ्राता च न्याय्येन त्वया रक्ष्या महारथ।
धर्मिष्ठानां कुले जातो न धर्मं त्वमवेक्षसे॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "हे पराक्रमी योद्धा! ऐसे पापपूर्ण वचन मत बोलिए। आप नहीं जानते कि कौन-सा कर्म धर्मसम्मत और न्यायसंगत है। आप धृतराष्ट्र के पुत्र और पाण्डवों की छोटी बहन दु:शला के पति हैं। हे पराक्रमी योद्धा राजकुमार! इस गुण से आप मेरे भाई हैं, अतः आपको मेरी रक्षा करनी चाहिए। आप धर्मात्मा लोगों के कुल में उत्पन्न हुए हैं, किन्तु आपकी दृष्टि धर्म पर नहीं है।
 
Draupadi said, "O mighty warrior! Do not speak such sinful words. You do not know which action is in accordance with Dharma and just. You are the husband of Dhritarashtra's son and Pandavas' younger sister Dushala. O mighty warrior prince! By this virtue you are my brother; hence you should protect me. You were born in a family of righteous people, but your eyes are not on Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)