Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.267.8-10h: वे अपने छहों भाइयों के साथ द्रौपदी के पवित्र आश्रम में इस प्रकार प्रविष्ट हुए, मानो कोई भेड़िया सिंह की मांद में घुस गया हो। वहाँ उन्होंने द्रौपदी से इस प्रकार कहा - 'वराओहि! क्या तुम कुशल से हो? क्या तुम्हारे पति स्वस्थ हैं? उनके अतिरिक्त और जिनको तुम सुरक्षित देखना चाहती हो, क्या वे सब स्वस्थ हैं?॥ 8-9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.267: जयद्रथ और द्रौपदीका संवाद । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स प्रविश्याश्रमं पुण्यं सिंहगोष्ठं वृको यथा॥ ८॥
आत्मना सप्तम: कृष्णामिदं वचनमब्रवीत्।
कुशलं ते वरारोहे भर्तारस्तेऽप्यनामया:॥ ९॥
येषां कुशलकामासि तेऽपि कच्चिदनामया:।
अनुवाद
वे अपने छहों भाइयों के साथ द्रौपदी के पवित्र आश्रम में इस प्रकार प्रविष्ट हुए, मानो कोई भेड़िया सिंह की मांद में घुस गया हो। वहाँ उन्होंने द्रौपदी से इस प्रकार कहा - 'वराओहि! क्या तुम कुशल से हो? क्या तुम्हारे पति स्वस्थ हैं? उनके अतिरिक्त और जिनको तुम सुरक्षित देखना चाहती हो, क्या वे सब स्वस्थ हैं?॥ 8-9 1/2॥
He entered the sacred hermitage of Draupadi along with his six brothers, becoming the seventh himself, as if a wolf had entered a lion's den. There he addressed Draupadi thus - 'Varaohee! Are you well? Is your husband healthy? Apart from him, all the other people whom you want to see safe, are they healthy?॥ 8-9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥