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अवमत्यास्य तद् वाक्यमाक्षिप्य च सुमध्यमा।
मैवमित्यब्रवीत् कृष्णा लज्जस्वेति च सैन्धव॥ १९॥
अनुवाद
उसके प्रस्ताव को तुच्छ समझकर सुन्दरी द्रौपदी ने उसे डाँटते हुए कहा, "खबरदार, फिर कभी ऐसा वचन मत कहना। हे सिन्धुराज! तुम्हें शर्म आनी चाहिए थी।"
Disdainful of his proposal, the beautiful Draupadi rebuked him and said, 'Beware, never utter such a word again. O King of Sindhus! You should have felt ashamed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥