श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.266.7 
प्राचीं राजा दक्षिणां भीमसेनो
जय: प्रतीचीं यमजावुदीचीम्।
मन्ये तु तेषां रथसत्तमानां
कालोऽभित: प्राप्त इहोपयातुम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘राजा युधिष्ठिर स्वयं पूर्व दिशा में, भीमसेन दक्षिण दिशा में, अर्जुन पश्चिम दिशा में और नकुल-सहदेव उत्तर दिशा में चले गए हैं। मैं समझता हूँ, अब उन महारथियों के सभी दिशाओं से यहाँ पहुँचने का समय आ गया है॥ 7॥
 
‘King Yudhishthira himself has gone in the east direction, Bhimsena in the south direction, Arjun in the west direction and Nakul-Sahadeva in the north direction. I think, now it is time for those great warriors to reach here from all directions.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)