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mahabharat 3.266.6: युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन और माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव - ये मेरे पति हैं। ये सभी मुझे यहीं छोड़कर चारों दिशाओं में हिंसक पशुओं का वध करने के लिए अलग-अलग हो गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.266.6 
युधिष्ठिरो भीमसेनार्जुनौ च
माद्रॺाश्च पुत्रौ पुरुषप्रवीरौ।
ते मां निवेश्येह दिशश्चतस्रो
विभज्य पार्था मृगयां प्रयाता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर, भीमसेन, अर्जुन और माद्री के वीर पुत्र नकुल और सहदेव - ये मेरे पति हैं। ये सभी मुझे यहीं छोड़कर चारों दिशाओं में हिंसक पशुओं का वध करने के लिए अलग-अलग हो गए हैं।
 
‘Yudhishthira, Bhimasena, Arjuna and the brave sons of Madri, Nakula and Sahadeva – these are my husbands. All of them have left me here and have split up and gone in the four directions to kill ferocious animals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)