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mahabharat 3.266.5: शिबिदेश के राजकुमार! मैं राजा द्रुपद की पुत्री हूँ। लोग मुझे कृष्ण के नाम से जानते हैं। मैंने खांडवप्रस्थ में रहने वाले पाँचों पांडवों को अपना पति स्वीकार किया है। आपने उनके नाम तो सुने ही होंगे।   |   mahabharat अध्याय 3.266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.266.5 
अपत्यमस्मि द्रुपदस्य राज्ञ:
कृष्णेति मां शैब्य विदुर्मनुष्या:।
साहं वृणे पञ्च जनान् पतित्वे
ये खाण्डवप्रस्थगता: श्रुतास्ते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शिबिदेश के राजकुमार! मैं राजा द्रुपद की पुत्री हूँ। लोग मुझे कृष्ण के नाम से जानते हैं। मैंने खांडवप्रस्थ में रहने वाले पाँचों पांडवों को अपना पति स्वीकार किया है। आपने उनके नाम तो सुने ही होंगे।
 
Prince of Shibidesh! I am the daughter of King Drupada. People know me by the name of Krishna. I have accepted the five Pandavas as my husbands, who lived in Khandavprastha. You must have heard their names.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)