श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 266: द्रौपदीका कोटिकास्यको उत्तर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.266.1 
वैशम्पायन उवाच
अथाब्रवीद् द्रौपदी राजपुत्री
पृष्टा शिबीनां प्रवरेण तेन।
अवेक्ष्य मन्दं प्रविमुच्य शाखां
संगृह्णती कौशिकमुत्तरीयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! शिबिदेश के प्रधान योद्धा कोटिकास्य के ऐसा पूछने पर राजकुमारी द्रौपदी कदम्ब वृक्ष की उस शाखा को छोड़कर, अपना रेशमी दुपट्टा ठीक करती हुई, संकोचपूर्वक उनकी ओर देखकर बोलीं:॥1॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On being asked this by Kotikasya, the chief warrior of Shibidesh, Princess Draupadi, leaving that branch of the Kadamba tree and adjusting her silken shawl, looked at him hesitantly and said:॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)