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mahabharat 3.265.7-8h: उनके बाद बड़े-बड़े नेत्रों वाले, सुन्दर पुष्पों की माला धारण करने वाले तथा महान धनुष धारण करने वाले ये वीर, जो आपकी ओर देख रहे हैं, कुलिन्दराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं। ये सदैव पर्वत पर निवास करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  3.265.7-8h 
अस्मात् परस्त्वेष महाधनुष्मान्
पुत्र: कुलिन्दाधिपतेर्वरिष्ठ:॥ ७॥
निरीक्षते त्वां विपुलायताक्ष:
सुपुष्पित: पर्वतवासनित्य:।
 
 
अनुवाद
उनके बाद बड़े-बड़े नेत्रों वाले, सुन्दर पुष्पों की माला धारण करने वाले तथा महान धनुष धारण करने वाले ये वीर, जो आपकी ओर देख रहे हैं, कुलिन्दराज के ज्येष्ठ पुत्र हैं। ये सदैव पर्वत पर निवास करते हैं।
 
After them, these heroes with big eyes, wearing garlands of beautiful flowers and carrying great bows, who are looking at you, are the eldest sons of the King of Kulinda. They always reside on the mountain. 7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)