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धातुर्विधातु: सवितुर्विभोर्वा
शक्रस्य वा त्वं सदनात् प्रपन्ना।
न ह्येव न: पृच्छसि ये वयं स्म
न चापि जानीम तवेह नाथम्॥ ४॥
अनुवाद
या फिर तुम धाता, विधाता, सविता, विभु या इंद्र के महल से यहाँ आई हो? न तुम हमारा परिचय पूछती हो और न ही हम यहाँ तुम्हारे पति के बारे में जानते हैं।
Or have you come here from the palace of Dhata, Vidhata, Savita, Vibhu or Indra? Neither you ask for our introduction nor we know about your husband here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥