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mahabharat 3.265.2: तुम अत्यंत सुन्दर हो। क्या तुम्हें इन वनों में भी भय नहीं लगता? क्या तुम किसी देवता, यक्ष, राक्षस या दैत्य की पत्नी हो या कोई महान अप्सरा हो?॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.265.2 
अतीव रूपेण समन्विता त्वं
न चाप्यरण्येषु बिभेषि किं नु।
देवी नु यक्षी यदि दानवी वा
वराप्सरा दैत्यवराङ्गना वा॥ २॥
 
 
अनुवाद
तुम अत्यंत सुन्दर हो। क्या तुम्हें इन वनों में भी भय नहीं लगता? क्या तुम किसी देवता, यक्ष, राक्षस या दैत्य की पत्नी हो या कोई महान अप्सरा हो?॥ 2॥
 
You are very beautiful. Are you not afraid even in these forests? Are you the wife of some god, yaksha, demon or monster or are you some great Apsara?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)