अजानतां ख्यापय न: सुकेशि
कस्यासि भार्या दुहिता च कस्य॥ १४॥
अनुवाद
सुकेशी! हम लोग तुमसे पूर्णतया अनभिज्ञ हैं, अतः अपना परिचय दो; तुम किसकी पत्नी और किसकी पुत्री हो?॥14॥
Sukeshi! We are completely unaware of you, so introduce yourself to us; whose wife and whose daughter are you?॥ 14॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि कोटिकास्यप्रश्ने पञ्चषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें कोटिकास्यका प्रश्नविषयक दो सौ पैसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)