Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.265.1: कोटिक बोले, "सुन्दर भौंहों वाली सुन्दरी! तुम कौन हो? तुम इस आश्रम में अकेली कदम्ब वृक्ष की एक शाखा पर टिकी हुई खड़ी हो और यहाँ बहुत सुन्दर लग रही हो। जैसे रात्रि में वायु से प्रज्वलित अग्नि की लपटें प्रज्वलित होती हैं, उसी प्रकार तुम इस आश्रम में अपनी प्रभा बिखेर रही हो।" | mahabharat अध्याय 3.265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कोटिक बोले, "सुन्दर भौंहों वाली सुन्दरी! तुम कौन हो? तुम इस आश्रम में अकेली कदम्ब वृक्ष की एक शाखा पर टिकी हुई खड़ी हो और यहाँ बहुत सुन्दर लग रही हो। जैसे रात्रि में वायु से प्रज्वलित अग्नि की लपटें प्रज्वलित होती हैं, उसी प्रकार तुम इस आश्रम में अपनी प्रभा बिखेर रही हो।"
Kotik said, "Beautiful girl with beautiful eyebrows! Who are you? You are standing alone in this ashram, leaning on a branch of a Kadamba tree and looking very pretty here. Just like the flames of a fire, agitated by the wind, appear radiant at night, in the same way you are spreading your radiance in this ashram.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥