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mahabharat 3.264.9: वह अत्यंत सुंदर लग रही थी और अपनी अप्रतिम कांति से जगमगा रही थी। जैसे बिजली अपनी चमक से नीले बादलों को प्रकाशित कर देती है, वैसे ही वह सुंदरी अपनी साड़ी से जंगल को चारों ओर से प्रकाशित कर रही थी।   |   mahabharat अध्याय 3.264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.264.9 
विभ्राजमानां वपुषा बिभ्रतीं रूपमुत्तमम्।
भ्राजयन्तीं वनोद्देशं नीलाभ्रमिव विद्युतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यंत सुंदर लग रही थी और अपनी अप्रतिम कांति से जगमगा रही थी। जैसे बिजली अपनी चमक से नीले बादलों को प्रकाशित कर देती है, वैसे ही वह सुंदरी अपनी साड़ी से जंगल को चारों ओर से प्रकाशित कर रही थी।
 
She was looking extremely beautiful and was radiating with her matchless radiance. Just as lightning illuminates the blue clouds with its radiance, in the same way that beautiful lady was illuminating the forest from all sides with her sari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)