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mahabharat 3.264.6-7: उस समय सिंधुदेश का परम यशस्वी राजा जयद्रथ, जो वृद्धक्षत्र का पुत्र था, विवाह की इच्छा से शाल्वदेश की ओर जा रहा था। वह बहुमूल्य राजसी वस्त्रों से सुसज्जित था। अनेक राजाओं के साथ भ्रमण करता हुआ वह काम्यकवन पहुँचा।   |   mahabharat अध्याय 3.264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.264.6-7 
ततस्तु राजा सिन्धूनां वार्द्धक्षत्रिर्महायशा:।
विवाहकाम: शाल्वेयान् प्रयात: सोऽभवत् तदा॥ ६॥
महता परिबर्हेण राजयोग्येन संवृत:।
राजभिर्बहुभि: सार्धमुपायात् काम्यकं च स:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उस समय सिंधुदेश का परम यशस्वी राजा जयद्रथ, जो वृद्धक्षत्र का पुत्र था, विवाह की इच्छा से शाल्वदेश की ओर जा रहा था। वह बहुमूल्य राजसी वस्त्रों से सुसज्जित था। अनेक राजाओं के साथ भ्रमण करता हुआ वह काम्यकवन पहुँचा।
 
At that time, the highly successful king of Sindhudesh, Jayadratha, who was the son of Vriddhakshatra, was going towards Shalvadesh with the desire of getting married. He was decked in precious royal attire. Travelling with many kings, he reached Kamyakavana. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)