Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.264.16-17: "यदि यह सुन्दरी मुझे मिल जाए, तो मैं बहुत संतुष्ट हो जाऊँगा। कोटिकास्य! जाकर पता लगाओ कि इसका पति कौन है।" जयद्रथ के ये वचन सुनकर कुण्डलों से विभूषित कोटिकास्य रथ से उतरकर द्रौपदी के पास गया और उससे वैसे ही पूछा, जैसे सियार बाघ की पत्नी से बात करता है। | mahabharat अध्याय 3.264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"यदि यह सुन्दरी मुझे मिल जाए, तो मैं बहुत संतुष्ट हो जाऊँगा। कोटिकास्य! जाकर पता लगाओ कि इसका पति कौन है।" जयद्रथ के ये वचन सुनकर कुण्डलों से विभूषित कोटिकास्य रथ से उतरकर द्रौपदी के पास गया और उससे वैसे ही पूछा, जैसे सियार बाघ की पत्नी से बात करता है।
"If I get this beautiful lady, I shall be very satisfied. Kotikasya! Go and find out who her husband is." On hearing these words of Jayadratha, Kotikasya, adorned with earrings, got down from the chariot and went to Draupadi and asked her just as a jackal talks to a tiger's wife.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि जयद्रथागमने चतु:षष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें जयद्रथका आगमनविषयक
दो सौ चौसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥