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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना
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श्लोक 13
श्लोक
3.264.13
विवाहार्थो न मे कश्चिदिमां प्राप्यातिसुन्दरीम्।
एतामेवाहमादाय गमिष्यामि स्वमालयम्॥ १३॥
अनुवाद
इस परम सुन्दरी को पाकर मुझे किसी अन्य से विवाह करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। मैं इसे साथ लेकर अपने घर लौट जाऊँगा॥13॥
After getting this extremely beautiful lady there will be no need for me to marry anyone else. I will take her with me and return to my home.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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