श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.264.11 
तत: स राजा सिन्धूनां वार्द्धक्षत्रिर्जयद्रथ:।
विस्मितस्त्वनवद्याङ्गीं दृष्ट्वा तां दुष्टमानस:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस सुन्दरी, निर्दोष शरीर वाली स्त्री को देखकर क्षत्रराज सिन्धुराज जयद्रथ बड़ा आश्चर्यचकित हुआ और उसके मन में एक दुष्ट विचार उत्पन्न हुआ॥11॥
 
Seeing that beautiful lady with flawless body, the old prince of Kshatra, Sindhuraj Jayadratha was astonished. A wicked thought arose in his mind.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)