श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.264.10 
अप्सरा देवकन्या वा माया वा देवनिर्मिता।
इति कृत्वाञ्जलिं सर्वे ददृशुस्तामनिन्दिताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जयद्रथ और उसके सभी साथी उस अपूर्व सुन्दरी को देखकर हाथ जोड़कर सोचने लगे, 'क्या यह कोई अप्सरा है, कोई दिव्य अप्सरा है, या देवताओं द्वारा रचित कोई माया है?'॥10॥
 
Jayadratha and all his companions looked at that incomparably beautiful lady and with folded hands began to wonder, 'Is she an Apsara, a celestial nymph, or an illusion created by the gods?'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)