श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 264: जयद्रथका द्रौपदीको देखकर मोहित होना और उसके पास कोटिकास्यको भेजना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.264.1 
वैशम्पायन उवाच
तस्मिन् बहुमृगेऽरण्ये अटमाना महारथा:।
काम्यके भरतश्रेष्ठा विजह्रुस्ते यथामरा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'जनमेजय! काम्यक वन में नाना प्रकार के जंगली पशु रहते थे। वहाँ भरतवंश के गौरवरूपी महारथी पाण्डव देवताओं के समान विहार करते थे।॥1॥
 
Vaishampayana says, 'Janamejaya! Various kinds of wild animals lived in Kamyak forest. There the Pandavas, the great warriors who were the pride of Bharat's clan, roamed around like gods.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)