Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.263.40-41: पाण्डव सोचने लगे, ‘मुनि दुर्वासा आधी रात को अचानक आकर हमें धोखा दे देंगे। भगवान की कृपा से हम पर जो यह महान संकट आया है, उससे हम कैसे बचेंगे?’ इस चिंता में वे बार-बार गहरी साँसें लेने लगे। उनकी यह दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर आदि पाण्डवों को दर्शन देकर कहा। 40-41। | mahabharat अध्याय 3.263: । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निशीथेऽभ्येत्य चाकस्मादस्मान् स छलयिष्यति।
कथं च निस्तरे मास्मात् कृच्छ्राद् दैवोपसादितात्॥ ४०॥
इति चिन्तापरान् दृष्ट्वा नि:श्वसन्तो मुहुर्मुहु:।
उवाच वचनं श्रीमान् कृष्ण: प्रत्यक्षतां गत:॥ ४१॥
अनुवाद
पाण्डव सोचने लगे, ‘मुनि दुर्वासा आधी रात को अचानक आकर हमें धोखा दे देंगे। भगवान की कृपा से हम पर जो यह महान संकट आया है, उससे हम कैसे बचेंगे?’ इस चिंता में वे बार-बार गहरी साँसें लेने लगे। उनकी यह दशा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर आदि पाण्डवों को दर्शन देकर कहा। 40-41।
The Pandavas started thinking, 'Muni Durvasa will suddenly come at midnight and deceive us. How will we be saved from this great trouble that has come upon us by the grace of God?' Worried about this, they started taking deep breaths again and again. Seeing their condition, Lord Krishna gave darshan to Yudhishthira and other Pandavas and said. 40-41.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥