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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 263:
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श्लोक 39
श्लोक
3.263.39
ततस्ते पाण्डवा: सर्वे प्रत्यागमनकाङ्क्षिण:।
प्रतीक्षन्त: कियत्कालं जितात्मानोऽवतस्थिरे॥ ३९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् सब पाण्डव अपने मन को वश में करके कुछ समय तक उसके लौटने की प्रतीक्षा करते रहे, इस आशा से कि वह लौट आएगा ॥39॥
Thereafter all the Pandavas, having controlled their minds, waited for some time for his return in the hope that he would return. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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