Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.263.2-4: अतिथि को आते देख पूज्य राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित उनसे मिलने गए। वे अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने अतिथि को लाकर उत्तम आसन पर आदरपूर्वक बैठाया और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया। फिर विधिपूर्वक उनका पूजन करके उन्हें अतिथि रूप में आमंत्रित किया और कहा - 'भगवन! आप नित्यकर्म समाप्त करके शीघ्र पधारें (भोजन के लिए)॥ 2-4॥ | mahabharat अध्याय 3.263: । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वाऽऽयान्तं तमतिथिं स च राजा युधिष्ठिर:॥ २॥
जगामाभिमुख: श्रीमान् सह भ्रातृभिरच्युत:।
तस्मै बद्ध्वाञ्जलिं सम्यगुपवेश्य वरासने॥ ३॥
विधिवत् पूजयित्वा तमातिथ्येन न्यमन्त्रयत्।
आह्निकं भगवन् कृत्वा शीघ्रमेहीति चाब्रवीत्॥ ४॥
अनुवाद
अतिथि को आते देख पूज्य राजा युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित उनसे मिलने गए। वे अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने अतिथि को लाकर उत्तम आसन पर आदरपूर्वक बैठाया और हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम किया। फिर विधिपूर्वक उनका पूजन करके उन्हें अतिथि रूप में आमंत्रित किया और कहा - 'भगवन! आप नित्यकर्म समाप्त करके शीघ्र पधारें (भोजन के लिए)॥ 2-4॥
On seeing the guest arriving, the revered king Yudhishthira went to meet him along with his brothers. He never deviated from his decorum. He brought the guest and made him sit respectfully on the best seat and bowed to him with folded hands. Then after worshipping him as per the rituals, he invited him as a guest and said - 'Lord! Please come soon after completing your daily routine (for food)'॥ 2-4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥