श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 263:  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.263.16 
दु:शासनादहं पूर्वं सभायां मोचिता यथा।
तथैव संकटादस्मान्मामुद्धर्तुमिहार्हसि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जैसे आपने पहले कौरव सभा में दु:शासन से मेरी रक्षा की थी, वैसे ही इस वर्तमान संकट से भी मेरी रक्षा कीजिए।॥16॥
 
O Lord! Just as you saved me from Dushasan in the Kaurava assembly earlier, please save me from this present crisis as well.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)