श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 263:  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  3.263.13-14 
नीलोत्पलदलश्याम पद्मगर्भारुणेक्षण।
पीताम्बरपरीधान लसत्कौस्तुभभूषण॥ १३॥
त्वमादिरन्तो भूतानां त्वमेव च परायणम्।
परात्परतरं ज्योतिर्विश्वात्मा सर्वतोमुख:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे नीले दलदल के समान सुन्दर श्याम! पीले वस्त्रधारी, कमल पुष्प के भीतरी भाग के समान किंचित लाल नेत्रों वाले श्रीकृष्ण! कौस्तुभमणि आपके वक्षस्थल पर शोभायमान है। हे प्रभु! आप ही समस्त प्राणियों के आदि और अंत हैं। आप ही सबके परम आश्रय हैं। आप ही परम ज्योतिर्मय परमात्मा और सर्वव्यापी ईश्वर हैं। 13-14॥
 
Shyam as beautiful as the blue marsh! Shri Krishna, wearing a yellow robe, with eyes slightly red like the inner part of a lotus flower! Kaustubha's jewel adorns your chest. Lord! You are the beginning and end of all beings. You are everyone's ultimate refuge. You are the supreme, luminous Supreme Soul and the omnipresent God. 13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)